Indian Republic News

ISRO को पूर्व अध्यक्ष की सलाह:स्पेस साइंटिस्ट बोले- मस्क के बिजनेस मॉडल से सीखने की जरुरत; रीयूजेबल रॉकेट टेक्नोलॉजी ISRO को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी

0

- Advertisement -

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर का कहना है कि भारत को रीयूजेबल रॉकेट टेक्नोलॉजी में महारथ हासिल करने के लिए ज्यादा काम करने की जरुरत है। जाने-माने स्पेस साइंसिस्ट ने कहा कि दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले रॉकेट की तकनीकी से भारत स्पेस प्रोग्राम की नई उपलब्धियों को हासिल कर सकता है।

उन्होंने ग्लोबल मार्केटिंग पर जोर देते हुए कहा कि हमें अंतरिक्ष के क्षेत्र में पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए स्पेस एक्स के संस्थापक एलन मस्क के बिजनेस मॉडल से सीख लेने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि फॉरेन सैटेलाइट लॉन्च और ग्लोबल मार्केट में अंतरिक्ष संबंधी सेवाओं के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।

30 से 40% सस्ती दरों पर सैटेलाइट लॉन्च करता है भारत
भारत के पास अर्थ ऑब्जर्वेशन और कम्यूनिकेशन प्लेटफॉर्म की बेसिक तकनीक एवं क्षमता है। हमने ग्लोबल मार्केट में कई अहम अवसर खो दिए हैं, क्योंकि भारत अंतरराष्ट्रीय दामों की तुलना में 30 से 40% सस्ती दरों पर सैटेलाइट लॉन्च की सर्विस ऑफर करता है।

उन्होंने कहा कि स्वाभाविक रूप से ऐसे देश जिनके पास लॉन्चिंग की क्षमता नहीं है, उनसे ज्यादा से ज्यादा सैटेलाइट लॉन्चिंग के प्रोजेक्ट लेकर खुद को मजबूत किया जा सकता है। इसलिए प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ने और बाजार में हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए मजबूत कदम उठाने की जरुरत है।

भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में संतुष्ट होने की जरूरत नहीं
उन्होंने कहा कि भारत पिछले 15-20 सालों से मस्क के दोबारा उपयोग की जाने वाली प्रक्षेपण प्रणाली (रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल) की चर्चा कर रहा है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कुछ हासिल नहीं हो पाया है। जब तक हम इस दिशा में आगे नहीं बढ़ते, तब तक हम (स्पेस ट्रांसपोर्टेशन) लागत कम नहीं कर सकते। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अर्थ आब्जर्वेशन से लेकर कम्यूनिकेशन सिस्टम और लॉन्च सर्विस में तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है, ऐसे में भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में संतुष्ट होने की जरूरत नहीं है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.