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5 साल बाद FIR दर्ज, चुनाव में टिकट दिलाने के नाम पर हुई थी ठगी

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लखनऊ: भाजपा नेता पर चुनाव में टिकट दिलाने के नाम पर 15 लाख रुपये ठगने का आरोप लगा है. मामला 2016 का है. कोर्ट के आदेश के बाद अब आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. पीड़ित हरि प्रकाश रावत के मुताबिक, 2016 में तत्कालीन मंडल अध्यक्ष रहे राजकुमार वर्मा ने चुनाव में टिकट दिलाने के नाम पर 15 लाख रुपये मांगे थे. रुपये देने और फिर टिकट न मिलने के बाद पीड़ित ने जब रुपये वापस मांगे तो आरोपी ने जान से मारने की धमकी दी.

आरोप है कि रामकुमार वर्मा ने झांसा देते हुए कहा कि मोहनलालगंज से जो सुरक्षित सीट है, वहां से उसे टिकट दिला देगा, जिसके चलते हरि प्रकाश रावत पार्टी का प्रचार जोरों-शोरों से करने लगे. वर्मा ने पीड़ित रावत की मुलाकात स्वतंत्र देव सिंह से भी करवाई थी. पीड़ित ने बताया कि मुलाकात के बाद राजकुमार ने मुझे अलग से बुलाया और कहा कि उसकी बात ऊपर लेवल पर हो गई है. टिकट के लिए पार्टी फंड में 15 लाख रुपये जमा करने होंगे, जिसकी उसे रसीद भी दी जाएगी.

हरि प्रकाश रावत के मुताबिक, वे 2012 में सरकारी सेवा से रिटायर हुए थे. इसके बाद वे अपने घर आलमबाग से मोहनलालगंज में रहने वाले रिश्तेदारों के घर आने-जाने लगे. इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं से मुलाकात हुई. फिर उनका मिलना-जुलना शुरू हो गया. इसी दौरान मोहनलालगंज के गोसाईगंज क्षेत्र से तत्कालीन मंडल अध्यक्ष रहे राजकुमार वर्मा से उनकी मुलाकात हुई. 2016 में राजकुमार वर्मा और अन्य लोगों के कहने पर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की. फिर पार्टी में एक्टिव होकर काम करने लगे.

पीड़ित का आरोप है कि राजकुमार वर्मा ने कहा कि अब उसकी सरकार आ गई है. फर्जी मुकदमा लिखवाकर उसे जेल भिजवा देगा. इसके बाद हरि प्रकाश रावत ने गोसाईगंज थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे लेकिन शिकायत दर्ज नहीं की गई. इसके बाद आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की गई. फिर आलमबाग थाना ने प्रारंभिक जांच कर मामले को गोसाईगंज थाना में ट्रांसफर कर दिया. पीड़ित ने बताया कि राजनीतिक रसूख के चलते आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. अब पीड़ित रावत ने कोर्ट का सहारा लिया जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने राजकुमार वर्मा के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी, जान से मारने की धमकी और एससी/एसटी एक्ट के तहत 406, 420, 504, 506 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता) निवारण अधिनियम 1989 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया.

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