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22 पंडो हुए घर से बेघर , खबर निकली झूठी, एक भी परिवार नहीं हुआ है बेघर – उदय पंडो

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एस.एम.पटेल,वाड्रफनगर/बलरामपुर:पंडो समाज के अध्यक्ष उदय पंडो ने मीडिया में चल रहे हैं खबरों की हवा निकाल दी ,उदय पंडो की माने तो जिन 22 पंडो जनजातियों को घर से बेघर करने की बात खबरों में प्रकाशित की गई है वे सभी खबर निराधार एवं बेबुनियाद हैं उन सभी पंडो जनजाति के लोगों के ग्राम पंचायत बैकुंठपुर में पहले से ही घर बने हुए हैं स्थानीय निवासी रामजन्म यादव के बहकावे में आकर पंडो जनजाति के लोगों के द्वारा वन अवैध अतिक्रमण कराया जा रहा था जिसका पंडो जनजाति के लोगों ने ही तगड़ा विरोध किया, जिसका नतीजा वहां की बैकुंठपुर के पंडो व वीरेंद्रनगर के पंडो समाज के लोग आमने-सामने हो गए इस लड़ाई का लाभ उठाते हुए रामजन्म यादव के द्वारा इस मामले को सियासी रंग देने का प्रयास किया गया एवं पंडो जनजाति के लोगों को बहकावे में लेकर घर से बेघर होने का झूठी बयानबाजी करवाई गई ताकि रामजन्म यादव के द्वारा वन भूमि में किए अतिक्रमण से बचा जा सके , पंडो समाज के पदाधिकारियों के द्वारा इसकी सूचना विशेष पिछड़ी जनजाति छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष उदय पंडो को दी गई जिसको गंभीरतापूर्वक लेते हुए उदय पंडो ने दोनों ग्रामों के पंडो समाज के उपस्थिति में वन अतिक्रमण स्थल एवं प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर मामले की जानकारी ली एवं पंडो समाज के विवाद को सुलझाने के लिए दोनों ग्रामों का दौरा करते हुए वन अतिक्रमण स्थल का निरीक्षण किया गया एवं चौपाल लगाकर बहकावे में आए पंडो जनजाति के लोगों से गहनता से पूछताछ की तब मामले की वास्तविकता सामने आई जिसमें पंडो जनजाति के लोगों ने बताया कि हम सभी का घर गांव में है सिर्फ यहां हम लोग माल – मवेशियों को बांधने एवं चढ़ाने आते हैं जिसको लेकर रामजन्म यादव के द्वारा वन भूमि पर कब्जा करने को प्रेरित किया एवं वन अधिकार पट्टा दिलाने का झांसा दिया जिसके बहकावे में आकर पंडो समाज के द्वारा वन भूमि पर प्लास्टिक खूटा झाला – झोपड़ी बनाकर कब्जा करने का प्रयास किए हैं
जिसका ग्राम पंचायत वीरेंद्रनगर के पंडो जनजाति के लोगों के द्वारा विरोध किया गया एवं वन अमला की उपस्थिति में नवीन अतिक्रमण को हटाया गया

प्रदेश में 22 पंडो के घर से बेघर होने की खबर ने प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी है

पंडो समाज के मुखिया ने खबरों का किया खंडन—

,, 22 पंडो के घर से बेघर करने की खबर का गंभीरता पूर्वक लेते हुए पंडो समाज के प्रतिनिधियों के साथ मैंने दोनों ग्रामों में दौरा करके देखा तो पाया कि किसी भी पंडो जनजाति के लोगों को घर से बेघर नहीं किया गया है और नहीं पंडो जनजाति की महिलाओं के साथ मारपीट हुआ है पंडो समाज के लोगों को बरगला कर अनर्गल बयानबाजी कराई गई है जिसका मैं खंडन करता हूं। — उदय पंडो
प्रांताध्यक्ष विशेष पिछड़ी जनजाति छत्तीसगढ़

क्या है पूरा मामला—

कुछ माह पूर्व बैकुंठपुर निवासी रामजन्म यादव के द्वारा वन अधिकार अधिनियम के तहत अधिकार पत्र दिए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था जिसमें ग्राम पंचायत बैकुंठपुर के पंडो जनजाति के 18 लोगों का नाम वन भूमि पट्टा प्राप्त करने की सूची में शामिल किया गया था परंतु वन अधिकार समिति के द्वारा मौका जांच किया गया तो किसी भी पंडो जनजाति का कब्जा मौके पर नहीं मिला जिसकी वजह से वन भूमि पट्टा के फार्म को निरस्त कर दिया गया जिसको लेकर रामजन्म यादव के द्वारा पंडो जनजाति के लोगों को बरगला ते हुए कहा गया कि यदि तुम लोग कब्जा किए रहते तो तुम लोग को पट्टा मिल जाता अभी भी समय है कब्जा करो तो पट्टा जरूर मिलेगा जिनके बहकावे में आकर पंडो जनजाति के लोगों ने नवीन अतिक्रमण करना प्रारंभ किया था जिसे पंडो जनजाति के लोगों एवं स्थानीय ग्रामीणों व वन समिति अध्यक्ष जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में वन अमला ने नवीन वन अतिक्रमण को हटा दिया ।

वनकर्मियों पर लगे , मारपीट के शिकायत पत्र को पंडो समाज के प्राथियों ने लिया वापस

प्रांताध्यक्ष उदय पंडो के द्वारा वीडियोग्राफी कराते हुए महिला एवं पंडो जनजाति के लोगों के साथ मारपीट से जुड़े मामले को गंभीरतापूर्वक लेते हुए पंडो समाज के पीड़ित, शिकायतकर्ता एवं समाज के लोगों से पूछताछ की गई तो उपस्थित महिला एवं पंडो समाज के लोगों ने मारपीट व लूट की घटना से इनकार किए , शिकायत कर्ताओं ने बताया कि वनकर्मियों के द्वारा नहीं ही घर गिराए गए हैं और ना ही किसी के साथ मारपीट की गई है वनकर्मियों के साथ आए वन समिति के अध्यक्ष एवं वीरेंद्रनगर के पंडो जनजाति के लोगों ने 2 दिन का समय दिए , साथ ही वन कर्मियों के द्वारा समझाइश दी गई थी , वनअतिक्रमण ना , हटाना पड़े जिसको लेकर योजनाबद्ध तरीके से बहकावे में आए पंडो जनजाति के लोग एवं कूटरचित साजिश के तहत डिंडो चौकी में जाकर शिकायत दी थी , मामले का सच सामने आने पर पंडो समाज के लोगों ने सर्वसम्मति से शपथ लेते हुए ना जंगल काटने न जंगल में अतिक्रमण होने देंगे साथ ही जंगल का रक्षा करेंगे व डिंडो पुलिस चौकी में किए गए शिकायत वापस करने का निर्णय लिये इसके बाद सभी शिकायत कर्ताओं के द्वारा डिंडो पुलिस चौकी में जाकर पुर्व में दिए गए शिकायत पर आपसी समझौता का आवेदन देते हुए कार्यवाही ना करने की मांग किए एवं भविष्य में वन कर्मियों का सहयोग करने का वादा किए

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