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भ्रष्टाचारियों का गढ़ बनता जा रहा बलरामपुर जिला, अब पीएचई विभाग में करोड़ों की राशि के गोलमाल का मामला।

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न्यूज डेस्क, बलरामपुर: बलरामपुर जिला अंतर्गत कुसमी में पीएचई के अफसरों ने बिना एस्टीमेट ही दे दिया 2.35 करोड़ का काम। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीएचई विभाग ने दिल्ली की एक ठेका कंपनी को गलफुला नदी में इंटेकवेल का काम करना था। यह कार्य 12 महीने में पूरा किया जाना था लेकिन बिना एस्टीमेट व प्लानिंग के काम करने की वजह से निर्माण पूरा होने में लगभग 6 वर्ष से भी अधिक का समय लगा।

सूचना के अधिकार से हुआ खुलासा

जब एक आरटीआई कार्यकर्ता ने इस मामले में जानकारी मांगी तो विभाग ने सूचना नहीं दी। अंततः सूचना आयोग की फटकार के बाद लगभग 2 साल बाद अफसरों द्वारा जानकारी दी गई और मामले का खुलासा हुआ। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई तो मुख्यमंत्री ने मुख्य अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बिलासपुर को जांच के आदेश दिए हैं।

35 लाख रुपए खर्च कर छुपाई गलती

इंटेकवेल निर्माण में दिल्ली की ठेका कंपनी इन वायरों इंजिनियर्स को 10 जून 2009 को वर्क आर्डर जारी किया गया था। इसे 2011 तक 12 माह में पूरा करना था लेकिन 2016 में किसी तरह बन पाया। निर्माण के 1 वर्ष के भीतर ही 2017 में यह धंस गया। जिसके बाद ठेकेदार ने गलतियों को छुपाने के लिए लगभग 3500000 रुपए खर्च कर क्षतिग्रस्त निर्माण को पूरा किया। साथ में किए गए किसी भी कार्य की एवं निर्माण सामग्री की टेस्टिंग भी सरकार के लाइफ में नहीं कराई गई।

इन अधिकारियों पर गिर सकती है गाज:

कार्यपालन अभियंता भीम सिंह, सहायक अभियंता नोहर सिंह जांगड़े, सहायक अभियंता एचएस हुसैन, व उप अभियंता सीएल कोरी जांच के घेरे में हैं। आरटीआई कार्यकर्ता ने जिम्मेदार अधिकारियों पर एफ आई आर दर्ज करने की मांग की है।

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