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कोरोना ने बढ़ाई यूनिवर्सिटी की मुसीबत, ज्यादातर छात्रों के पास होने से 37 हजार सीटों पर 1 लाख से ज्यादा आवदेन!

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दुर्ग के हेमचन्द यूनिवर्सिटी में इस बार एडमिशन लेने वालों के संख्या में भारी इजाफा हुआ है.

  दुर्ग : दुर्ग के हेमचन्द यूनिवर्सिटी में इस बार एडमिशन लेने वालों के संख्या में भारी इजाफा हुआ है. लगभग एक लाख सात हजार छात्रों द्वारा आवेदन जमा किए गए हैं. जिसके चलते यूनिवर्सिटी के आगे अब एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. क्योंकि यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए सिर्फ 37 हजार सीटे ही उपलब्ध है. वहीं इस बार यूनिवर्सिटी ने नए छात्रों द्वारा कालेज के एडमिशन फीस भरपूर में राहत दी गई है.

दरअसल कोरोना काल के दौरान 12वीं के छात्रों को ऑफलाइन एग्जाम लेकर पास कर दिया गया, लेकिन यह सुविधा अब विश्वविद्यालयों के लिए मुसीबत बन गयी है. दुर्ग जिले के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में इस बार स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के लिए लगभग एक लाख सात हजार छात्रों ने आवेदन किया है. लेकिन दुर्ग जिले से संबंध हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के 141 कॉलेजों में सिर्फ 37000 सीटें ही स्नातक एवं स्नातकोत्तर के उपलब्ध हैं.
वहीं इस बार पिछले साल की अपेक्षा दोगुनी से अधिक आवेदन विश्वविद्यालय को मिले है. विश्वविद्यालय में इस बार कट ऑफ दिल्ली यूनिवर्सिटी के कट ऑफ़ के बराबर चला गया है. जिसमें बीए में 88 प्रतिशत, बीकॉम में 93% साइंस की अगर बात करें तो गणित 96% और बायो में 95% तक है. यानी एक सीट के पीछे 5 छात्रों में इस बार कंपटीशन होगा.


विश्वविद्यालय में इस बार बीए के सर्टिफिकेट 37,912 आवेदन, बीएससी के 39,750 आवेदन और बीकॉम के 19,423 आवेदन मिले हैं. अब इन सब के बीच विश्वविद्यालय के कुलपति ने उच्च शिक्षा मंत्री व सचिव से चर्चा कर सीटें बढ़ाने की मांग की है. वर्तमान स्थिति के अनुसार विश्वविद्यालय में 10 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जा सकती हैं. क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई समाप्त होने के बाद बच्चों की बैठक व्यवस्था करने में समस्या हो सकती है. इसलिए इस साल महज 10 प्रतिशत सीटें ही बढ़ाई जा सकती है.
दूसरी ओर विश्वविद्यालय ने इस बार एडमिशन फीस निशुल्क रखा है. प्रवेश शुल्क निशुल्क होने के कारण विश्व विद्यालय में फॉर्म की संख्या बढ़ी है. साथ ही साथ छात्रों को दो से अधिक कॉलेजों में फॉर्म जमा करने की सुविधा भी दी गई है. इस व्यवस्था से लगभग 70 लाख रुपए के कोष की हानि विश्वविद्यालय को हो रही है. 


विवि की कुलपति डॉ अरुणा पलटा का कहना हैं कि इस बार एडमिशन निशुल्क रखा गया है. जिससे आवेदनों की संख्या बढ़ी है. वहीं कुछ छात्रों ने दो से अधिक कॉलेजों में फॉर्म भरा है जिसके चलते इस बार संख्या एक लाख के अधिक पहुंच गई है.

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