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आंगनवाड़ी वर्कर फेडरेशन एटक की राष्ट्रीय परिषद बैठक में मौजूद रहीं पूर्व डीजीपी सुश्री अनुराधा शंकर एटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड हरिद्वार सिंह भी

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आंगनबाड़ी वर्कर फेडरेशन (एटक) की दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक 31 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक भोपाल में सम्पन्न हुई। यह बैठक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका यूनियन एटक मध्यप्रदेश के तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसमें देश के 10 राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया।बैठक में फेडरेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड ऊषा साहनी, राष्ट्रीय महासचिव कामरेड माधुरी क्षीरसागर, पूर्व महासचिव कामरेड विजयलक्ष्मी जी प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व डीजीपी सुश्री अनुराधा शंकर (आईपीएस) मौजूद रहीं। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की आर्थिक, सामाजिक स्थिति तथा महिलाओं पर हो रहे उत्पीड़न के मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि संघर्ष ही अधिकार पाने का सबसे सशक्त रास्ता है।बैठक की शुरुआत में देशभर में असामयिक रूप से दिवंगत हुई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं एवं दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। स्वागत भाषण मध्यप्रदेश की महामंत्री श्रीमती विभा पांडे ने दिया। इसके बाद राष्ट्रीय महासचिव कामरेड माधुरी क्षीरसागर (अधिवक्ता) ने संगठन द्वारा किए गए कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत की और आगामी संघर्ष की रणनीति रखी।राष्ट्रीय परिषद में प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं को कर्मचारी का दर्जा, शिक्षक के समान वेतन निर्धारण, असामयिक मृत्यु पर एक करोड़ रुपये का बीमा, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी एक्ट के तहत ग्रेच्युटी, हर 5 वर्ष में योग्यता के आधार पर पदोन्नति, कार्यकर्ता से सुपरवाइजर/परियोजना अधिकारी तक पदोन्नति, सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष किए जाने तथा कार्य का स्पष्ट निर्धारण शामिल है।बैठक में गुजरात हाईकोर्ट के फैसलों पर भी चर्चा हुई। निर्णय लिया गया कि अलग-अलग राज्यों में उच्च न्यायालयों में याचिकाएं दायर की जाएंगी और प्राप्त आदेशों के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी। करीब 20 प्रतिनिधियों ने बहस में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।राष्ट्रीय परिषद ने सर्वसम्मति से 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल तथा 21, 22 और 23 अप्रैल 2026 को दिल्ली में पड़ाव का ऐलान किया। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक स्थायीकरण और मांगों की पूर्ति नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। 22 राज्यों में एटक संगठन के माध्यम से एक साथ पिटीशन दाखिल करने और संसद के भीतर-बाहर मुद्दे उठाने का निर्णय लिया गया।बैठक की अध्यक्षता कर रहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड ऊषा साहनी ने सभी प्रस्तावों को पढ़कर सुनाया। अंत में कामरेड गायत्री बाजपेई ने बैठक का समापन किया और देशभर से आए नेताओं व प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।बैठक में एटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड हरिद्वार सिंह, प्रांतीय महामंत्री कामरेड एस.एस. मौर्य, प्रांतीय उपाध्यक्ष कामरेड अरविंद श्रीवास्तव, उप-प्रांतीय महासचिव द्वय कामरेड संजय नामदेव एवं कामरेड रामसरोज कुशवाहा, वामपंथी नेता कामरेड शैलेंद्र शैली, महाराष्ट्र एटक के महामंत्री कामरेड श्याम काले, ओडिशा के महासचिव कामरेड विजय जेना तथा बिहार के एटक नेता कामरेड बिंदेश्वर जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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