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बाल विवाह मुक्त सूरजपुर बनाने के लिए किया जा रहा शिक्षकों को जागरूक

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सूरजपुर/(IRN.24…) कलेक्टर श्री एस जयवर्धन के निर्देश एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री रमेश साहू के मार्गदर्शन में बाल विवाह मुक्त सूरजपुर बनाने के लिए पूरा जिला का अमला संकल्पित है। कलेक्टर महोदय के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती भारती वर्मा ने सभी हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के शिक्षकों को बाल विवाह के साथ बाल अधिकारों की जानकारी के लिए प्रत्येक विकासखण्ड में एक दिवसीय कार्यशाला में उपस्थिति हेतु निर्देशित किया है इसी क्रम में आज विकासखण्ड भैयाथान में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन शा. हा. से. स्कूल भैयाथान में आयोजित किया गया।    कार्यशाला में सभी शिक्षको को संबोधित करते हुए जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल ने बताया कि सूरजपुर में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एन एफ एच एस) 5 के अनुसार छ.ग. में सबसे अधिक बाल विवाह सूरजपुर जिले में 34 प्रतिशत होते हैं। अभी विभाग के सक्रियता से बाल विवाह पर काफी अंकुश लगया गया है। वर्तमान में सभी एस.डी.एम. की अध्यक्षता को टास्क फोर्स का गठन कलेक्टर द्वारा किया गया है। पर अपने जिले को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के लिए आप सभी को सक्रिय होने की आवश्यकता है। क्योकि देखने में आया है ज्यादातर बाल विवाह 9 वीं से लेकर 12वीं पढ़ने या ड्राप आउट बच्चियों का हो रहा है। इस उम्र की बालिका हाई स्कूल या हायर सेकेण्डरी स्कूल में पढती हैं। उन्हें यदि जागरूक कर दिया गया तो बाल विवाह में 90 प्रतिशत विराम लग सकता है इसलिए यह कार्यशाला का आयोजन किया गया है। बाल विवाह से लड़कियों को कई नुकसान होते हैं। जिसमें मुख्य मानसिक एवं शारिरीक परेशानी है। लडकियों का उम्र नही होने से विवाह के बाद आने वाली जिम्मेदारियों को निर्वहन नहीं कर सकती है उम्र नही होने और शारीरिक रूप से मजबूत नही होने के कारण गर्भधारण में भी परेशानी होती है। कम उम्र के कारण जच्चा बच्चा दोनो को खतरा होता है। परिवार का संचालन भी कम उम्र में विवाह के कारण नही हो पाता। बाल विवाह सभी कारणों के अतिरिक्त यह कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। बाल विवाह करने वाले, सहयोग करने वाले, शामिल होने वाले या इसे बढ़ावा देने वाले के ऊपर एक लाख रूपये जुर्माना और दो वर्ष के सजा का प्रावधान दिया गया है। इसलिए प्रत्येक स्कूल के प्रत्येक बच्चे को इसकी जानकारी हो तो यह बुराई समाज से दुर की जा सकती है। श्री जायसवाल ने लैंगिक अपराध से बालको का संरक्षण अधिनियम 2012 की विस्तृत जानकारी दी, उन्होंने बताया की लडके एवं लडकीयो को इसके सम्बंध में जानकारी होना जरूरी है। बच्चो को असुरक्षित स्पर्श की जानकारी होनी चाहिए।

उन्हे बदलते उम्र की जानकारी और उसके बदलाव एंव शारीरिक परिवर्तन की जानकारी भी होनी चाहिए। उसके बचाव के लिए बच्चो को जागरूक करना आवश्यक है। आज कल शिक्षकों को भी जागरूक होने की आवश्यकता है। बच्चों को कम उम्र में नशे की लत भी पड रही है उससे उन्हे बचाने की आवश्यकता है। बच्चो को नशे से बचाने के लिए शिोर न्याय अधिनियम की धारा 77 और 78 को लाया गया है। इसके अन्तर्ग यदि किसी बच्चे से नशे का कारोबार कराया जाता है या ससे खरीद बिक्री कराया जाता है या बच्चो के साथ नशा किया जाता है ता उसे दो वर्ष की कारावास या एक लाख रुपये जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जा सकता है।विवाह के बाद आने वाली जिम्मेदारियों को निर्वहन नही कर सकती है उम्र नही होने और शारीरिक रूप से मजबूत नहीं होने के कारण गर्भधारण में भी परेशानी होती है। कम उम्र के कारण जच्चा बच्चा दोनो को खतरा होता है। परिवार का संचालन भी कम उम्र में विवाह के कारण नही हो पाता। बाल विवाह सभी कारण के अतिरिक्त यह कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। बाल विवाह करने वाले, सहयोग करने वाले, सामील होने वाले या इसे बढावा देने वाले के उपर एक लाख रूपये जुर्माना और दो वर्ष के सजा का प्रावधान दिया गया है। इसलिए प्रत्येक स्कूल के प्रत्येक बच्चे को इसकी जानकारी हो तो यह बुराई समाज से दुर की जा सकती है।श्री जायसवाल ने लैंगिक अपराध से बालको का संरक्षण अधिनियम 2012 की विस्तृत जानकारी दी, उन्होंने बताया की लडके एवं लडकीयो को इसके सम्बंध में जानकारी होना जरूरी है। बच्चो को असुरक्षित स्पर्श की जानकारी होनी चाहिए। उन्हे बदलते उम्र की जानकारी और उसके बदलाव एंव शारीरिक परिर्वतन की जानकारी भी होनी चाहिए। उसके बचाव के लिए बच्चो को जागरूक करना आवश्यक है। इाज कल शिक्षकों को भी जागरूक होने की आवश्यकता है। बच्चो को कम उम्र में नशे की लत भी पड रही है उससे उन्हे बचाने की आवश्यकता है। बच्चो को नशे से बचाने के लिए शिोर न्याय अधिनियम की धारा 77 और 78 को लाया गया है। इसके अन्तर्ग यदि किसी बच्चे से नशे का कारोबार कराया जाता है या ससे खरीद बिक्री कराया जाता है या बच्चो के साथ नशा किया जाता है ता उसे दो वर्ष की कारावास या एक लाख रूपये जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जा सकता है।

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